Sunday, March 30, 2014

डूबता सूर्य

' डूबता सूर्य
गोता लगाता है
गहन अँधेरे के सागर में
लाने के लिए
एक और प्रातः ;
बस इसी तरह
डूबता रहता है वो
क्षण दिन माह वर्ष कल्प के
आयामों में बंधा
बार बार
पर तब तक ,
जब तक
वो समर्थ है
पुनः उग आने को ,
और तब तक
जब तक
संघर्षों में
प्रकाश की बाट जोहता रहेगा
जीवन !
सच में आदित्य
तुम सिखाते हो
उगने के लिए
डूबने का महत्त्व ! ©

No comments:

Post a Comment