Friday, March 28, 2014

गुरु जी

तकरीबन 3 किलोमीटर बिना रास्तों के पहाड़ खेतों से गुजर कर उस छोटे से गाँव में आधा घंटा पता पूछने  के बाद एक बगीचे में गाँव के बच्चों को वो 54 वर्षीय पढ़ाते मिले । मुझे आता देख कर उन्होंने नमस्ते किया पर मैंने जवाब नहीं दिया ... सीधे पैर छुए । खुद ही पहचाने गुरु जी पूछने के बाद दुबारा जब मैंने अपना नाम उन्हें बताया तो अचरज से मुझे देखने लगे ...फिर  ढेर सारी बातें पुरानी यादें ताजा हो गई  । बड़े सख्त स्वाभिमानी अनुशासन प्रिय अध्यापक थे वो , 20 साल बाद उनसे मिलने आये किसी पुराने शिष्य का परिचय अपने नए शिष्यों को देते समय  भावुकता को छिपाने का जो प्रयास वो कर रहे थे उससे स्पष्ट था कि वो तनिक भी नहीं बदले । जब मैं चलने को हुआ तो गेट तक छोड़ने आये लेकिन न जाने क्यों अब वो चुप ही रहे । खैर मैंने बाईक स्टार्ट की और काफी आगे बढ़ आया था पर रिवर व्यू मिरर पर वो अभी तक मुझे देखते हुए दिख रहे थे । मुस्कुराता मैं सब समझता था , वो भले ही चुप रहे पर रिवर व्यू मिरर उनकी तरफ से बार बार ' objects in the mirror are closer than they appear ' ये ही बोल रहा था । - कौशल ©

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