व्यस्त चौराहे की चिल्ल पों के बीच ' हैप्पी होली अंकल ' पीछे से एक प्यारी सी आवाज आई , मुड़ कर देखा मोटरसाईकिल पर बैठी एक बच्ची थी । ' हैप्पी होली बेटा ' मैंने जवाब तो दिया पर दुविधा दूर करने के लिए उससे पूछा ' बेटा आप जानती हैं मुझको ? ' वो बोली ' नहीं ' । अब मैंने पूछा ' फिर मुझे क्यों विश किया ? '। कानो के रास्ते दिल में उतर गया जब उसने कहा ' होली तो सबको विश करते है न ' ... आगे उसने बताया .. 4th में पढ़ती है , टाईफाईड से पीड़ित है , अभी इंजेक्शन लगवा के आ रही , और दवा दूध लेकर आये पिता के साथ जाते जाते अपना नाम .. ' अलीज़ा .. माय नेम इज अलीज़ा फ़िरोज़ ' कानो में गूंजता उसका नाम और दिल में बसी उसकी सूरत से सराबोर मैं सोच रहा था ' ज़रूरी नहीं कि हर बार ' प्रहलाद ' हिन्दू ही हो ' ... - कौशल ©
No comments:
Post a Comment