Thursday, April 3, 2014

दोष

आफिस के अन्दर बॉस और आफिस के रास्ते पर ट्रैफिक जाम शांतिपूर्ण नौकरी के लिए  दो सबसे बड़ी मुसीबतें होती हैं । भारी ट्रैफिक के बीच एक कार वाला अधेड़ व्यग्रता तत्परता से समय के साथ प्रतिद्वंदिता करता भागा चला जा रहा था पर गांधी रोड की रेड लाईट पार की तो कड़ाके की ठण्ड में स्कूटर पर माँ बाप के बीच बैठे बच्चे को देखकर मानो समय रुक गया । इससे पहले कि वो रतन टाटा बनता कि उसे अपना परिवार याद आगया उसे ये याद आया कि कैसे अन्तरंगताओं के उन क्षणों में उसकी संतान बीच में आ जाती और जिस शरीर का वो आलिंगन चाहता उससे लिपट कर सो जाती , कैसे वो पति पत्नी से पहले माँ बाप हुआ करते थे  , एक पल को चेहरे पर मुस्कान खिल उठी लेकिन  ' आप कैसे किसी को मेरे लिए चुन सकते हैं .. पापा मेरी निजताएं स्वतंत्रताएं हैं Its my life .. Its my life' सोच कर कब वो ऊर्ध्वापातित हुई भनक तक न लगीं , और Its my life का स्वर बाईं तरफ से लेन में घुसने का प्रयास करती बाईक के कर्कश हार्न में तब्दील हो गया .. अब न चाहते हुए भी उसे ब्रेक लगाना पड़ सकता है , जानता है कि दोष हमेशा बड़ी गाडी वाले को ही दिया जाता ... - कौशल ©

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