Sunday, April 6, 2014

सवाल

श्रृद्धालुओं के जत्थों के बीच ' जय माता की ! जै मैय्या की ! जय माँ की ! ' के तेज उद्दघोष करने की होड़ मची थी , सब पूरे जोश से इसमे अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे थे । आगे वाला जत्था बोलता फिर पीछे वाला उसका जवाब देता काफी देर चलने के बाद विश्राम जलपान के लिए वो जत्था रुका और फिर जब दुबारा चला तो बड़ों का जयघोष मौन में बदल चुका था आस्था श्रृद्धा भक्ति से फूटते प्रचंड स्वर आज एक मासूम सवाल से घुट कर रह गए थे । ' कन्या के रूप में आई मैय्या ' बजने के बीच माँ से तमाचा बाप से झिड़क और ' ये सिखाते है आप ' जैसे प्रश्न उठने से पहले उस अबोध बच्ची ने बस इतना पूछ लिया था ' पापा अंकल आज आप लोग पूरा क्यों नहीं बोल रहे ... जैसे रोज बोलते हैं ' तेरी माँ की ** ' .... - कौशल ©

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