वो रक्त रंजित विदीर्ण शरीर तड़पता रहा रात भर । जीने के लिए .. अपनी असहाय संतानों से एक आख़िरी बार मिलने के लिए और एक चुल्लू पानी के लिए । पर उसे कुछ भी नसीब न हुआ ... सुबह को ' पेट के बल ' पड़ी मिली उसकी लाश और चारों तरफ बिखरा खून लोगों के लिए उसका ' घिसटना ' भर था पर वास्तव में वो छिपाना चाहती थी अपने रात भर नोचे घसोट अंग .. क्योंकि जानती थी वो सभ्य समाज का सच ... और इसकी मर्यादा । - © ब्रह्म राक्षस
Truly awesome....
ReplyDelete