Saturday, January 21, 2012

मृत्य ...................... जीवन !!!


... मृत्यु सुना है
तुम बहुत निष्ठुर हो
लेकर आती हो तुम
शोक , संताप , रुदन , क्रंदन
अश्रु , टीस बिछोह और बिलखन
छीन लेती हो तुम
सपने , आशाये स्नेह , संबल
संतान , मित्र माता पिता
पति पत्नी और स्वजन
फ़िर भी मृत्यु
मैं तुमसे तनिक भी
घृणा नही करता
मेरे लिये
तुम हो एक पण्यपति
जो खरा सौदा करता
छोड कर जाता जो
अधिकार , समर्पण , उत्तरदायित्व
संकल्प , विश्वास ,
ध्येय और कर्तव्य
कोपलों सरीखी नव आशायें व स्वप्न
और एक धरातल जिसमें सृजित होता है
एक और जीवन ...

No comments:

Post a Comment