.............कब यहां अमर विस्वास , अमिट है कब आस्था ?
बस एक शून्य जिसमें होता सब कुछ विलीन ,
आबद्ध परिस्थिति - मनोवृत्ति की सीमा से ,
मै जो लिखता वह सब कितना अर्थहीन !
Monday, September 19, 2011
हम हमेशा घटिया शायरी को लेकर ट्रक वालों का मजाक उडाते हैं .. पर इस ट्रक वाले की भावना को नमन । :)
No comments:
Post a Comment