.............कब यहां अमर विस्वास , अमिट है कब आस्था ? बस एक शून्य जिसमें होता सब कुछ विलीन , आबद्ध परिस्थिति - मनोवृत्ति की सीमा से , मै जो लिखता वह सब कितना अर्थहीन !
Tuesday, July 28, 2009
" राम कथा के अमर रचयिता , है जन्म दिवस पर अभिनंदन ।। "
एक दृश्य ...
भारतीय रेल का सामान्य डिब्बा , प्रजातंत्र का सच्चा प्रतीक , सब अपनी अपनी मे मस्त । अचानक कहीं से स्वर उठता है ..
सीय राम मै सब जग जानी S S s s । करहुं प्रणाम जोरि जुग पानी S S S s s s ।।
एक भिखारी राम चरित मानस की पावन चौपाईयों का गान करता हुआ दिखायी देता है ।
कुछ लोगो ने कुछ पैसे उसके हाथ मे रख दिये , तो कुछ स्वर उठे कि आप ने ही बढावा दे रखा है इन जैसों कामचोरों को ..... भिखारी बोल उठा " भाईसाहब काम चोर न कहियेगा दिन भर भजन गाता हूं , और उसी का खाता हूं । वो तो भला हो तुलसी बाबा का जिन्होने ने रामायण ( श्री राम चरित मानस ) लिखी । ...
अगला दृश्य ....
एक बड़े महानगर का वातानिकूलित , सर्व सुविधा संपन्न सभागार .. कुलीन वर्ग के स्त्री पुरुषों से भरा हुया ... बडे़ ही सुन्दर ढंग से सजाये गये मंच पर एक महात्मा शोभायमान है । सुरीले वाद्य यंत्र अपनी तान छेडते है , और महात्मा जी के कंठ से स्वर फूटता है ...
हरि अनंत हरि कथा अनंता S S s s । कहहि सुनहि बहु विधि सब संता S S S s s s ।।
जब कथा विराम लेती तो और चढावा चढने लगता है , एक सज्जन महात्मा जी गायन , चौपाईयों और उनकी व्याख्या की प्रशंसा करते है । इस पर महात्मा जी कहते है कि सब प्रभु की महिमा है ... कृपा है गोस्वामी जी की जो मानस की रचना की । ...
उपरोक्त दोनों दृश्यों के वर्णन के पीछे मेरा एक मात्र उद्देश्य यह दर्शाना है कि अपने रचना काल से ४४५ वर्ष पश्चात भी श्री राम चरित मानस की प्रासंगिकता लोकप्रियता कम न होकर वरन बढ गयी है ।... समाज का कोई भी वर्ग हो मानस की महिमा से अछूता नहीं है । तभी यह भारत मे सबसे ज्यादा छपने , बिकने , पढा जाने वाला ग्रन्थ है । मानस वेद - पुराणों का सार है , नैतिकता का महाकाव्य , मानस सुख और शांति का सागर है । गोस्वामी जी ने मानस मे भक्ति और वैराग्य दोनों दिये है , साकार और निराकार दोनो का वर्णन है मानस में , मानस को जिस किसी ने पढा हृदय से लगा लिया । सच्चे अर्थो मे गोस्वामी जी ने मानस के माध्यम से श्री राम को घर घर मे पहुचा दिया । आज अगर मै ये कहूं कि मानस एक धर्म ग्रन्थ न होकर स्वयं साक्षात श्री राम हैं तो अतिशयोक्ति न होगी । .. और इस सबका श्रेय जाता है गोस्वामी तुलसी दास जी को जिनका कि आज जन्म दिवस है ।
" हे भक्त पवन सुत के तुलसी , हुलसी सुत तव शत शत वंदन ।
राम कथा के अमर रचयिता , है जन्म दिवस पर अभिनंदन ।। "
श्री राम चरित मानस भारतीय ( हिन्दी ) साहित्य , आध्यात्म , दर्शन , समाज सुधार सभी कुछ समाहित किये हुये एक पावन रचना है गोस्वामी जी की । और ये गोस्वामी जी की प्रबल राम भक्ति , उत्साह , चरित्रबल और हिन्दुत्व का तेज ही था जिसके बल पर उन्होने हिन्दू धर्म के प्रतिकूल काल में हिन्दू धर्म के सबसे महानतम ग्रन्थो की रचना कर डाली । ’ श्री राम चरित मानस ’ , गीतावली , दोहावली , विनय पत्रिका , कवित्त रामायण , रामलला नहछू , जानकी मंगल , बरवै रामायण , वैराग्य संदीपनी आदि ।
गोस्वामी जी ने एक स्थान पर कहा है .." कीरति भनिति भूति भलि सोई । सुरसरि सम सब कहं हित होई ।। " ( यश , सम्पदा , कविता / साहित्य तभी सार्थक है जब वह सुरसरि ’ गंगा ’ के समान सब का हित करने वाला हो ) ... और श्री राम चरित मानस के माध्यम से गोस्वामी जी ने इस लक्ष्य को साक्षात प्राप्त भी किया है ।
तुमने पथ में ज्योति बिछाकर , तम का पूर्ण विराम कर दिया ।
राम चरित को ऐसा गाया , हर रसना पर राम धर दिया ।।
दुख दर्दों की घोर अमां में तुम करुणा के भान बन गये ।
रत्ना के सुकुमार पुजारी तुम युग के वरदान बन गये ।।
अपना सब श्रृंगार लुटाये जब आंसू ढलती थी हिन्दी ।
भावों के आभूषण देकर धर दी भाल ’ कला ’ की बिन्दी ।।
रोती भाषा के अधरों की तुम पावन मुस्कान बन गये ।
रत्ना के सुकुमार पुजारी तुम युग के वरदान बन गये ।।
तुम युग के थे नव निर्माता , तुम थे भक्ति श्रोत अधिनायक ।
शक्ति , शील सौन्दर्य सरीखा रख आदर्श बने जन नायक ।।
चरणों पर नत मस्तक मेरा तुम चिर अमर महान बन गये ।।
ओ रत्ना के सुकुमार पुजारी तुम युग के वरदान बन गये ।।
सच्चे अर्थ में गोस्वामी जी भारतीय संस्कृति के महान उन्नायक थे , लोकनायक थे .. भारतीय जनता मे व्याप्त परस्पर विरोधी संस्कृतियों , साधनाओं , आचार-विचारों , चारित्रिक पतन , मानवीय मूल्यों के प्रति अनास्था , नैतिक मूल्यों का पतन , सामाजिक , पारिवारिक विघटन , स्वार्थ परायणता भौतिकता के प्रति तीव्र आकर्षण , कुंठा , संत्रास के बीच तुलसी दास जी का चरित्र व साहित्य समन्वय व लोक हित की विराट चेष्टा लिये स्थित था और आज भी है । आवश्यकता है तो बस उससे प्रेरणा लेकर अनुसरण करने की .... आदर्श बनाने की ....
।। जय श्री राम ।।
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इसे अपना सौभाग्य ही समझूंगा जो आज गोस्वामी तुलसी दास जी के जन्म दिवस के पावन अवसर पर अपने चिठ्ठे का शुभारम्भ कर रहा हूं ..
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